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काली रात (मर्डर मिस्ट्री)

काली रात यह घटना पूर्ण रूप से काल्पनिक है किरदार और उनके नाम मात्र एक सयोंग है लेखक और पाठकों के बीच एक अजीब सी डोर होती है जिसे भाव कहते है,बस उसी भाव मन से "काली रात"पडियेगा।  

                                                            काली रात (मर्डर मिस्ट्री)




राजू अरे राजू.....राजू
जी साब........
राजू पानी पिला यार......
. लाया साहब.......(राजू बूढ़े साब के लिये पानी लेने किचन की और चला).......
..आआआआआआआआआहहहहहहहहहह    (एक चीख रात के सन्नाटे को चीरती हुई ) घर के हर कमरे मे घूल जाती है...
..............रा...र ..राजू क्या हुआ तु चुप क्यों है  .. (आवाज लगाते हुए बुढे पाण्डे जी किचन मे चले गये)...

..आआआआआआआआहहहहहहहहह्अअअअअ (शायद अब ये आवाज बूढ़े पांडे जी की थी) सर से टपकता खुन और रूकी हुयी सांसे बंया कर रही थी की उनके शरीर मे जान बाकी नही रही है....
सुबह चार बजे.....


इंस्पेक्टर- घर पर कल रात कौन कौन था..?

रेखा- जी सर हमारा नौकर राजू और बाबूजी बस दोनो ही थे।
इंस्पेक्टर- नौकर कहां हे तुम्हारा..?
रेखा- वो अस्पताल मे है उसको भी चोट लगी हैं।...डॉ ..और रेखा दोनो दोस्त रहे है और अब कुछ समय से मनमुटाव है
....
.........2 घंटे बाद (अस्पताल मे) डॉ क्या हम इसका बयान ले सकते हैं ..? जी पर ध्यान रखना सर बस ये इशारो मे जवाब दे सकता है।ठीक है डॉ,आप हमे अकेला छोड़ दीजिए .........

राजू तुम जानते हो ये चोट कैसे लगी..?राजू- नही साहेब जब हम किचन मे गयत् रहे तभी बत्ती बुझ गयी और हमार खुपडियां मे धनन् से लगत् रही....जब आंख खुलत रही तो इंहा डाक्टरनी कहत् रही तुम टेम रहत् आई गवत् नी तो राम नाम् हुई जात्............

.कदम् ये मुँह खोलेगा नही और ऐसे मे थर्ड डिग्री ठीक नही .....................
इस मौत को कई तरह के नाम मिल चुके थे (बाबूजी हत्या कांड,,पांडे जी मर्डर मिस्ट्री......) छ महिने चली जाँच पडताल मे कुछ नही मिला और ना कुछ ढूँढने लायक पुलिस ने समझा....(क्यों की पांडे जी की बस एक विधवा बहू थी और नौकर रामु)....फाइलो पर चढी धूल मे एक और फाइल बड गयी थी...फिर एक शाम इंस्पेक्टर कदम् और टीम उसी घर मे थे लेकिन इस बार एक नही दो मर्डर थे एक रेखा और दूसरा नौकर रामू का...
ये सब् कैसे हुआ?साब हम तो यही बाजू मे रहते है यहाँ कल बच्चे बाडे मे बाॅल लेने आये थे तभी किचन की खिड़की से बच्चो ने देखा और फिर हम सब ने आपको खबर दी........

......फारेंसिक को बुलाव और एंबुलेंस को भी लाशे बदबू मार रही है दो-तीन दिन पुराना मामला लग रहा हैं.... ...कौन हो सकता है इन सब के पीछे और किस लिये इनको मारा है... ?कदम् खुद से सवाल कर रहा था इंवेस्टीगेशन मे अपराधी के शक पर खुद राजू और रेखा बाबूजी वाले केस मे,रेखा और रामू के केसे अब तक कोई सबूत नही था।
मर्डर प्लेस से मिला डंडा और चाकू फारेंसिक डॉ के पास थे तभी डॉ ने ये कहते हुये इंस्पेक्टर कदम् के ऊंगलीयो के निशान भी ले लिये की केस मे अगर कही किसी जगह गलती से अगर आपके निशान आ गये हो जाँच मे तो हम नजर अंदाज कर दे ,,,,,,...
.. डॉ ने कदम् और रेखा की गर्दन पर मिले निशान मेच करने के लिये रख दिये।शक सही भी निकल रहा था क्यों की कदम् ने तीन महीने तक केस मे कोई कार्यवाही नही की।डॉ ने सबूतो की एक काॅपी अलग बना कर इस केस को जिला न्यायालय मे खुलवा दिया........

.............8 साल तक केस चलता रहा गवाह सबूत सब बदलते रहे पर जो बदला था वो बस कदम् का सपना...वो कहते है ना इंसान को सपने ही अर्श और फर्श दिखाते है.....


...........कदम् फिर वही पहुँचा जहाँ आज से आठ साल पहले गया था कदम् की नजर पांडे जी के हिरे पर थी जिसकी एक्जीब्यूशन् उन्होंने 9 साल पहले लगवायी थी और सुरक्षा का जिम्मा कदम् और टीम पर था लेकिन कदम् जानता था की इस घर मे घूस कर हीरा चुराना आसान लेकिन बदकिस्म्मति से दोनो बार कुछ नही मिला और इस बार भी नही .......कदम् को रंगे हाथ पकड़ लीया गया....लेकिन काली रात खत्म नही हुई थी ....... क्यों की पांडे जी की हत्या के समय कदम् थाने मे था इस बात को सबूत के तौर पर माना गया है....लेकिन हीरे की बात सुनकर रेखा और नौकर को कदम् ने जरूर मारना कबूला.........इंसाफ तो हुआ लेकिन अधूरा ही क्यों की" काली रात्" अभी बाकी है.........




Written by vijayraj patidar

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