* लेखन *
लेखन दरअसल आत्म अभिव्यक्ति हैं आप जो कुछ भी आस-पास देखते हैं,महसूस करते,सहन करते हैं, असल मे वहीं आपके शब्द बनते है बस उनको एक सकारात्मक विचार धारा मे पिरोना ही लेखन हैं।
आप सोच रहे होंगे आज इतने कम शब्दो मे कैसे बात पूरीकर गया।
यही तो लेखन हैं कम शब्दो मे बहुत कह जाना,,
यही तो लेखन हैं कम शब्दो मे बहुत कह जाना,,
"आसान हे सब कुछ बस एक शुरुआत करके देखिए अंत भी आपके चाहे अनुसार ही होगा"
विचार-: विजयराज पाटीदार
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